हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , मौलाना सैयद तहज़ीबुल हसन रिज़वी ने कहा है कि इस साल की ईद हर साल की तरह मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत धैर्य की परीक्षा वाली है। ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिका और इज़राइल इस्लाम को नुकसान पहुँचाने के इरादे से तैयार हैं। इस्लाम, इंसानियत और मजलूमों की आवाज़ बनकर ईरान डटकर सामना कर रहा है।
जैसा कि ईरान में लगभग 200 बच्चों को निशाना बनाकर इज़राइल ने उन्हें शहीद कर दिया। और ईरान के सर्वोच्च नेता तथा मुस्लिम समुदाय की आँखों के तारे आयतुल्लाह ख़ामनेई और उनके दूसरे चाहने वालों को शहादत का प्याला पीना पड़ रहा है। इस वजह से मुस्लिम समुदाय में अमेरिका और इज़राइल के प्रति गम और गुस्से की लहर है।
इन शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए हम सबका नैतिक कर्तव्य है कि हम ईद को सादगी से मनाएँ, और शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि दें। ईद खुदा का इनाम है, हम इस पर शुक्र करते हैं। फिर भी मुसीबत झेलने वालों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना भी एक इबादत है।
आज पूरी दुनिया में अकेला ईरान ही ऐसा है जो इस्लाम के लिए अपनी कुर्बानी पेश कर रहा है। ईरान ने अपनी जान की कुर्बानी और अपनी वफादारी से पूरी इस्लामी दुनिया को यह संदेश दे दिया है कि इस्लाम के लिए वही आगे बढ़ सकते हैं जो अल्लाह के सबसे प्यारे बंदे हों।
अब आज मुसलमान खुद तय कर लें कि इस्लाम किसके पास है, शरीयत किसके पास है, कुरान किसके पास है। सिर्फ कुरान का होना काफी नहीं है, बल्कि कुरान के अर्थों और उसके संदेशों पर अपनी जिंदगी जीना ही असली इस्लाम है। और आज इस्लाम का हमदर्द (दुख दर्द बाँटने वाला) और इस्लाम का सहायक अगर कोई दिख रहा है तो वह ईरान है।
और इस ईरान ने यह बता दिया है कि मुसलमानों में सभी कायर नहीं होते, कुछ बहादुर भी होते हैं। इस बहादुरी का लोहा अमेरिका और इज़राइल ने भी मान लिया है। और इंशाअल्लाह एक न एक दिन अमेरिका और इज़राइल दोनों घुटनों के बल चलकर ईरान से माफ़ी माँगेंगे, और इस्लाम की जीत होगी।
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